संक्षेप में

  • बायोचार बायोमास को सीमित ऑक्सीजन में गर्म करके बनाया गया कार्बन-समृद्ध पदार्थ है।
  • इसे किसी उपयोगी उद्देश्य—आमतौर पर मिट्टी, कम्पोस्ट या कृषि इनपुट—के लिए तैयार और परखा जाता है।
  • साधारण चारकोल मुख्य रूप से ईंधन के लिए बनाया जाता है। एक जैसा दिखना, मिट्टी के लिए एक जैसे गुणों की गारंटी नहीं है।
  • कच्चा माल, तापमान, राख, pH, लवण और संदूषक इसके व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

उद्देश्य से परिभाषित पदार्थ

फसल अवशेष, लकड़ी या अन्य उपयुक्त जैविक कच्चे माल को सीमित ऑक्सीजन में गर्म करने पर बायोचार बनता है। इस प्रक्रिया को पायरोलिसिस कहते हैं। आसानी से विघटित होने वाला हिस्सा बदल जाता है और पीछे कार्बन-समृद्ध, छिद्रयुक्त ठोस पदार्थ बचता है।

इंटरनेशनल बायोचार इनिशिएटिव बायोचार को ऑक्सीजन-सीमित वातावरण में बायोमास के ऊष्मीय परिवर्तन से बने पदार्थ के रूप में परिभाषित करता है। लेकिन केवल “बायोचार” नाम गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। मिट्टी में उपयोग के लिए सामग्री का सुरक्षित उत्पादन और उचित परीक्षण जरूरी है।

चारकोल भी मिलती-जुलती प्रक्रिया से बन सकता है, पर उसका प्रमुख उद्देश्य जलाकर ऊर्जा प्राप्त करना होता है। ईंधन चारकोल को उसके जलने और गर्मी देने के आधार पर देखा जाता है। कृषि बायोचार को मिट्टी, पौधों, सूक्ष्मजीवों, पोषक तत्वों और पर्यावरणीय सुरक्षा के संदर्भ में समझना पड़ता है।

बायोचार केवल “मिट्टी में डाला गया चारकोल” नहीं है। इसके गुण कृषि उपयोग के उद्देश्य से मेल खाने चाहिए।

दो काले पदार्थ अलग व्यवहार क्यों करते हैं

कच्चा माल बहुत मायने रखता है। लकड़ी से बना बायोचार पोषक-समृद्ध अवशेष से बने बायोचार से काफी अलग हो सकता है। तापमान और प्रक्रिया का समय कार्बन संरचना, pH, राख, सतह और छिद्रों को प्रभावित करते हैं। पीसना, धोना, पुराना करना, कम्पोस्ट करना या पोषक और जैविक घटक जोड़ना भी अंतिम व्यवहार बदल सकता है।

इसलिए एक बायोचार पर हुए शोध का परिणाम हर बायोचार पर लागू नहीं किया जा सकता। अधिक pH वाला पदार्थ अम्लीय मिट्टी में उपयोगी हो सकता है, लेकिन दूसरी मिट्टी में उपयुक्त नहीं। अधिक राख, घुलनशील लवण या बहुत महीन कणों वाली सामग्री को सावधानी से परखना चाहिए।

मिट्टी में संभावित भूमिका

सही सामग्री और सही मिट्टी में बायोचार पानी रोकने, पोषक तत्वों के व्यवहार, अम्लता, मिट्टी की संरचना और जड़ों के आसपास के वातावरण को प्रभावित कर सकता है। समय के साथ उसकी सतह मिट्टी के खनिजों, ऑर्गेनिक पदार्थों और सूक्ष्मजीवों के साथ बदलती रहती है।

इसका अर्थ यह नहीं कि हर बायोचार उपज बढ़ाएगा। बायोचार अपने आप पूर्ण उर्वरक नहीं है। यदि उसमें पोषक तत्व जानबूझकर नहीं जोड़े गए हैं, तो वह फसल की पोषण जरूरत पूरी नहीं कर सकता।

गुणवत्ता समझने के व्यावहारिक प्रश्न

  • कच्चा माल क्या था और क्या वह स्वच्छ तथा पता लगाने योग्य है?
  • सामग्री कैसे बनाई गई?
  • उसका pH, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, राख और नमी कितनी है?
  • संबंधित संदूषकों की जांच हुई है?
  • कण आकार सुरक्षित उपयोग के लिए उपयुक्त है?
  • इसे अकेले उपयोग किया जा रहा है या ऑर्गेनिक पदार्थ, पोषण अथवा जैविकी के साथ?
  • यह इस विशेष मिट्टी की कौन-सी समस्या हल करेगा?

सही दृष्टिकोण न तो “हर बायोचार लाभकारी है” और न “बायोचार काम नहीं करता।” सही सवाल है—क्या यह विशेष सामग्री, तैयारी और उपयोग इस मिट्टी तथा खेती के उद्देश्य के लिए उपयुक्त है?

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