संक्षेप में
- मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन, मिट्टी के ऑर्गेनिक पदार्थ में मौजूद कार्बन है।
- यह मिट्टी की संरचना, पानी, पोषक चक्र और जैविक जीवन से जुड़ा है।
- केवल एक प्रतिशत संख्या पूरी मिट्टी का स्वास्थ्य नहीं बताती; बनावट, गहराई, जलवायु और प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हैं।
- कार्बन बढ़ाने के लिए लगातार जैविक इनपुट और अच्छा प्रबंधन चाहिए, केवल एक उत्पाद नहीं।
कार्बन मिट्टी की पूरी प्रणाली का हिस्सा है
फसल अवशेष, जड़ें, गोबर खाद और अन्य जैविक पदार्थ मिट्टी में आने पर सूक्ष्मजीवों द्वारा बदले जाते हैं। कुछ कार्बन श्वसन से वातावरण में लौटता है। कुछ सूक्ष्मजीवी जैवभार, ऑर्गेनिक यौगिकों या मिट्टी के कणों और खनिजों से जुड़ जाता है। इसलिए मिट्टी का कार्बन स्थिर ढेर नहीं, बल्कि लगातार बदलता पूल है।
ऑर्गेनिक पदार्थ मिट्टी के कणों को जोड़ने, छिद्र बनाने, पानी रोकने और पोषक तत्वों के आदान-प्रदान में मदद करता है। यही पदार्थ मिट्टी के जीवन के बड़े हिस्से को ऊर्जा भी देता है। कार्बन का कम होना कमजोर मिट्टी कार्यक्षमता का कारण और संकेत दोनों हो सकता है।
FAO ने भारत में कम मिट्टी ऑर्गेनिक कार्बन को बड़ी चुनौती बताया है और राष्ट्रीय औसत लगभग 0.54 प्रतिशत बताया है। यह समस्या की गंभीरता समझाता है, लेकिन खेत का निर्णय स्थानीय जांच से ही होना चाहिए। मिट्टी का प्रकार, भूमि उपयोग, क्षेत्र और नमूना गहराई परिणाम बदल सकते हैं।
कार्बन क्यों कम होता है
जब खेत से निकलने वाला जैवभार, वापस आने वाले जैवभार से लगातार अधिक हो, तो कार्बन घट सकता है। अवशेष पूरी तरह हटाना या जलाना, कटाव, कम जैविक इनपुट, अधिक अनावश्यक जुताई और खाली मिट्टी इसके कारण बन सकते हैं। गर्म जलवायु जैविक विघटन को तेज कर सकती है।
लेकिन हर गिरावट का कारण केवल उर्वरक या जुताई नहीं है। जलवायु, फसल उत्पादन, जड़ वृद्धि, अवशेष प्रबंधन, खाद उपलब्धता, कटाव और मिट्टी के खनिज—सभी मिलकर असर डालते हैं।
पुनर्निर्माण के लिए क्या चाहिए
- उपयुक्त फसल अवशेष खेत में वापस लाना।
- सुरक्षित और अच्छी तरह प्रबंधित गोबर खाद, कम्पोस्ट या अन्य ऑर्गेनिक संसाधनों का उपयोग।
- जहां संभव हो विविध फसल चक्र और मिट्टी ढकने वाली फसलें।
- कटाव कम करना और भूमि को ढका रखना।
- संतुलित पोषण, ताकि फसल पर्याप्त जड़ें और जैवभार बनाए।
- अनावश्यक मिट्टी व्यवधान कम करना।
- गुणवत्ता और स्थानीय प्रमाण के आधार पर स्थिर कार्बन सामग्री का उपयोग।
बायोचार का महत्व इसलिए है क्योंकि उसके कार्बन का एक हिस्सा धीरे विघटित होता है। लेकिन उसे ताजे ऑर्गेनिक पदार्थ, जड़ों और अच्छे प्रबंधन का विकल्प नहीं मानना चाहिए। जीवंत मिट्टी को टिकाऊ आवास और लगातार ऊर्जा—दोनों चाहिए।
मिट्टी का कार्बन बढ़ाना एक लगातार चलने वाली खेती प्रक्रिया है, केवल एक बार काला पदार्थ डालना नहीं।
दावे नहीं, रुझान मापें
मिट्टी जांच से आधार बन सकता है, लेकिन नमूना लेने की जगह, गहराई, मौसम और प्रयोगशाला विधि एक जैसी होनी चाहिए। फसल, अवशेष और पोषण प्रबंधन का रिकॉर्ड भी रखें। पानी सोखने की गति, पपड़ी, मिट्टी के ढेले, जड़ वृद्धि और जैविक सक्रियता जैसे फील्ड संकेत प्रयोगशाला संख्या को समझने में मदद करते हैं।
भारत की मिट्टी-कार्बन चुनौती केवल कार्बन जमा करने की नहीं है। यह उत्पादक, संसाधन-कुशल और सहनशील कृषि के लिए मिट्टी की क्षमता दोबारा बनाने की चुनौती है।




